SALAM
प्यारे इमाम अस्सलाम आली मकाम अस्सलाम
ज़हरा के लाल अस्सलाम आली मकाम अस्सलाम।
ज़िकर तुम्हारा जब लिखा रोने लगा क़लम हुसैन,
कैसे मैं वाक़ियात-ए-ग़म आख़िर करू रक़म हुसैन,
दिल में तुम्हारी याद है हाथों पे है अलम हुसैन,
लेते रहेंगे हश्र तक नाम तुम्हारा हम हुसैन...
प्यारे इमाम अस्सलाम आली मकाम अस्सलाम
ज़हरा के लाल अस्सलाम आली मकाम अस्सलाम।
भुली न जाएगी कभी आपकी ज़िंदगी हुसैन,
तीरों के साए में भी की ख़ालिक़ की बंदगी हुसैन,
आप के खून से हुई दीन में रोशनी हुसैन,
आप ने जगमगा दिया दीन-ए-मुहम्मदी हुसैन।
प्यारे इमाम अस्सलाम आली मकाम अस्सलाम
ज़हरा के लाल अस्सलाम आली मकाम अस्सलाम।
आप ने कैसी शान से सब्र का इम्तिहान दिया,
वक्त पड़ा तो आपने अकबर सा नौजवान दिया,
फिर भी रही अगर कमी असगर सा बे ज़ुबान दिया,
शोलों में गुलिस्ताँ दिया दीन-ए-नबी बचा लिया...
प्यारे इमाम अस्सलाम आली मकाम अस्सलाम
ज़हरा के लाल अस्सलाम आली मकाम अस्सलाम।
जाना पड़े एक दिन हर एक को रब के सामने,
अपना किया हुआ सितम आएगा सब के सामने,
कैसे तू जाएगा यज़ीद शह-ए-उमम के सामने,
अपने लहू में तर हुसैन आएंगे सब के सामने।
प्यारे इमाम अस्सलाम आली मकाम अस्सलाम
ज़हरा के लाल अस्सलाम आली मकाम अस्सलाम।
0 Comments