मैय्यत को ग़ुस्ल देने का तरीका (इस्लामी हुक्म व मुकम्मल रहनुमाई)
मसला: मैय्यत को ग़ुस्ल देना फ़र्ज़ किफ़ाया है यानी अगर एक ने ग़ुस्ल दे दिया तो सभी लोगों से फ़र्ज़ उतर गया और अगर किसी ने भी ग़ुस्ल नहीं दिया तो जिन जिन लोगों को इल्म था सभी फ़र्ज़ के तारिक और गुनहगार हुए। (संक्षिप्त सारांश)
मैयत का वुज़ू:
यह भी जानें कि मैयत के वुज़ू में पहले गट्टों तक हाथ धोना, कुल्ली करना और नाक में पानी डालना और गर्दन का मसह कराना नहीं है इसलिए वुज़ू इस तरह कराएंगे कि पहले चेहरा धोएं फिर दोनों हाथों को कोहनियों तक फिर सर का मसह और आख़िर में दोनों पांव। हां उंगलियों में रूई लपेट कर मुंह मे फेरें और इसी तरह नाक में भी।
ग़ुस्ले मैयत के सात मरहले
- इस्तिंजा कराना इस्तिंजा करवाने वाला अपने हाथ पर कपड़ा लपेट ले।
- वुज़ू कराना - यानी तीन बार चेहरा और तीन बार कोहनियों समेत हाथ धुलाना, एक बार पूरे सर का मसह कराना, तीन बार पांव धुलाना।
- सर और दाढ़ी के बाल धोना
- मैयत को उल्टी बाएं करवट पर लिटाकर सीधी दाहिनी करवट धोना
- मैयत को सीधी दाहिनी करवट पर लिटाकर उल्टी बाएं करवट धोना
- पीठ से सहारा देते हुए बिठा कर नर्मी से पेट के निचले हिस्से पर हाथ फेरना
- एक मर्तबा सारे बदन पर पानी बहाना फ़र्ज़ है जबकि तीन मर्तबा बहाना सुन्नत है। आख़िर में सर से पांव तक काफ़ूर का पानी बहा कर किसी पाक कपड़े से बदन आहिस्ता से पोंछ दें। (तजहीज़ व तकफ़ीन का तरीक़ा, सफ़्हा-८६, संक्षिप्त)
मैयत को ग़ुस्ल देने का तरीक़ा
सवाल: मैयत को ग़ुस्ल किस तरह दिया जाए?
जवाब:
मैयत को ग़ुस्ल देने का तरीक़ा यह है कि जिस चारपाई या तख़्त या तख़्ते पर (मैयत को) नहलाने का इरादा हो उसकी तीन या पांच या सात बार धोनी दें यानी जिस चीज़ में वह खुशबू सुलगती हो उसे इतनी बार चारपाई वग़ैरह के गिर्द फिराएं और उस पर मैयत को लिटा कर नाफ़ से घुटनों तक किसी कपड़े से छुपा दें
फिर नहलाने वाला अपने हाथ पर कपड़ा लपेटकर पहले इस्तिंजा कराए फिर नमाज़ का सा वुज़ू कराए यानी मुंह धोए फिर कोहिनियों समेत दोनों हाथ फिर सर का मसह करें फिर पांव धोएं मगर मैयत के वुज़ू में गट्टों तक पहले हाथ धोना और कुल्ली करना और नाक में पानी डालना नहीं है
हां कोई कपड़ा या रूई की फुरेरी भिगोकर दांतों और मसूढ़ों और होठों और नथनों पर फेर दें फिर सर और दाढ़ी के बाल हों तो धोएं वरना खाली पानी भी काफ़ी है
फिर बाईं करवट पर लिटाकर (दाहिनी ओर) सर से पांव तक बैरी का पानी बहाएं कि तख़्ते तक पहुंच जाए फिर दाहिनी करवट पर लिटाकर (बाईं ओर) यूं ही करें और बैरी के पत्ते जोश दिया हुआ पानी न हो तो ख़ालिस पानी नीम गर्म काफ़ी है
फिर टेक लगाकर बिठाएं और नरमी के साथ नीचे को पेट पर हाथ फेरें, अगर कुछ निकले धो डालें, वुज़ू व ग़ुस्ल का इ'आदह न करें फिर आख़िर में सर से पांव तक काफ़ूर का पानी बहाएं फिर उसके बदन को किसी पाक कपड़े से आहिस्ता-आहिस्ता पोंछ दें।
एक मर्तबा सारे बदन पर पानी बहाना फ़र्ज़ है और तीन बार सुन्नत है, जहां ग़ुस्ल दे मुस्तहब यह है कि परदा कर लें कि सिवाय नहलाने वालों और मददगारों के दूसरा ना देखे, नहलाते समय ख़्वाह इस तरह लिटाएं जैसे क़ब्र में रखते हैं या क़िब्ला की तरफ पांव करके या जो आसान हो करें।

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